दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान चुनाव आयोग द्वारा हटाए गए मतदाताओं से फॉर्म 6 भरने का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। इस संदर्भ में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत के समक्ष मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग उन मतदाताओं से फॉर्म 6 भरने का आग्रह कर रहा है जिनके नाम पहले से सूची में थे लेकिन SIR के दौरान हटा दिए गए।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
28 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि ऐसे मतदाताओं को नए मतदाता के रूप में फॉर्म 6 भरने के लिए मजबूर करना चुनाव आयोग की गलती है। याचिकाकर्ताओं अंजलि भारद्वाज और अमृता जोहरी की ओर से प्रशांत भूषण, शेरिल डिसूजा और नेहा राठी ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि इस तरह का कदम कानूनी कार्रवाई और जेल की सजा का कारण बन सकता है।
मतदाताओं की चिंता
प्रशांत भूषण ने बताया कि मतदाता इस स्थिति से असमंजस में हैं और उन्हें डर है कि फॉर्म 6 में गलत जानकारी देने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर विचार कर रहा है, इसलिए मतदाताओं को डरने की जरूरत नहीं है।
समयसीमा में बदलाव
चुनाव आयोग ने दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख को 30 अक्टूबर से बढ़ाकर 25 नवंबर कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिवाली की छुट्टियों के बाद इस मुद्दे पर सुनवाई होगी। कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह है कि SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं को पुनः सूची में शामिल करने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जाए और क्या उन्हें नए मतदाता के रूप में आवेदन करने के लिए बाध्य किया जा सकता है।
Source: NDTV India
