राजस्थान के कानौता-बांदीकुई रेलखंड पर कवच तकनीक का शुभारंभ हो गया है, जिससे रेलवे ट्रैक पर आमने-सामने की दुर्घटनाओं को रोकने में सहायता मिलेगी। यह तकनीक 67 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर लागू की गई है, जिसमें सात ब्लॉक सेक्शन शामिल हैं।
कवच तकनीक का परिचय
उत्तर पश्चिम रेलवे के कानौता-बांदीकुई रेलखंड पर कवच प्रणाली के सफल परीक्षण के बाद इसे लागू किया गया है। यह पहली बार है जब उत्तर पश्चिम रेलवे में इस तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। इस प्रणाली का उद्देश्य ट्रेन संचालन के दौरान सुरक्षा को बढ़ाना है।
कवच प्रणाली स्वचालित रूप से ट्रेन की गति को नियंत्रित करती है और टक्कर की स्थिति में ट्रेनों को रोकने की क्षमता रखती है। इसके अलावा, ओवरस्पीडिंग की स्थिति में स्वचालित ब्रेकिंग सिस्टम का कार्यान्वयन भी शामिल है।
तकनीक का परीक्षण और लाभ
कवच प्रणाली का ट्रायल कानौता-बस्सी और झर-जटवाड़ा जैसे सेक्शनों में सफलतापूर्वक किया गया। इसके बाद, 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति पर स्पीड टेस्टिंग की गई।
इस तकनीक के माध्यम से ट्रेन के लोको पायलट को खराब मौसम में भी सिग्नल की जानकारी मिलती रहेगी, जिससे ट्रेन संचालन में देरी नहीं होगी। यह एक स्वदेशी तकनीक है, जो कम लागत में तैयार की गई है और उत्तर पश्चिम रेलवे के ट्रैक को पूरी तरह से इससे लैस किया जा रहा है।
आधुनिक सुरक्षा उपाय
कवच तकनीक के माध्यम से अनधिकृत रूप से ट्रेन के रुकने की स्थिति में स्वचालित SOS सुविधा उपलब्ध है। इस तकनीक की सहायता से लोको पायलट को स्टेशन और प्लेटफार्म की पूरी जानकारी समय-समय पर मिलती रहेगी।
राजस्थान में इस तकनीक के सफल कार्यान्वयन से रेलवे दुर्घटनाओं में कमी की उम्मीद है और यह प्रणाली रेल परिचालन को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाएगी।
Source: BBC World News
