पंजाब में आम आदमी पार्टी के दो विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इन विधायकों ने पंजाब की बिगड़ती स्थिति के लिए अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।
नशा और कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल
विधायकों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पंजाब को नशामुक्त और भ्रष्टाचारमुक्त बनाने के चुनावी वादों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि नशे की समस्या पर सरकार का नियंत्रण कमजोर है, जिसके चलते चिट्टे की बिक्री और नशे की होम डिलीवरी जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा पर भी चिंता जताई गई।
मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या का हवाला देते हुए विधायकों ने कानून व्यवस्था पर सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि पंजाब में अपराधियों में कानून का डर कम हो गया है, जिससे चेन स्नैचिंग और हत्याओं की घटनाएं बढ़ रही हैं।
भ्रष्टाचार और किसानों के मुद्दे
भ्रष्टाचार के आरोपों में सरकार को घेरते हुए विधायकों ने सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई में एक समान मापदंड क्यों नहीं अपनाया जा रहा।
किसानों के मुद्दों पर बात करते हुए उन्होंने एमएसपी की गारंटी, मक्का और मूंग की खरीद, और यूरिया की उपलब्धता जैसे मुद्दे उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों से किए गए कई चुनावी वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति
पंजाब के शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र की स्थिति को लेकर भी विधायकों ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राज्य के करीब 2,400 स्कूल केवल एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग में भी कई पद खाली हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
आयुष्मान योजना और 16 मेडिकल कॉलेज बनाने के चुनावी वादे पर भी सवाल उठाए गए। विधायकों ने दलित समुदाय से जुड़े मुद्दों और बेअदबी के मामलों पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया।
Source: BBC World News
