ब्राजील में लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा के पुनः चुनाव अभियान के समर्थन में बनाए गए एक व्हाट्सएप चैनल को उनके सहयोगियों द्वारा इस हालिया राजनीतिक वापसी के लिए श्रेय दिया जा रहा है। ब्राजील के वामपंथी राष्ट्रपति, जो पहले दक्षिणपंथी प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो से पीछे थे, ने तीन सप्ताह में इस दौड़ को पलट दिया।
लूला की सेना का उदय
जब कई लोग लूला की जीत की संभावना पर संदेह कर रहे थे, तब ‘लूला की सेना’ नामक एक व्हाट्सएप चैनल उभरा, जिसने तेजी से 10.8 मिलियन अनुयायियों को आकर्षित किया। सांसद आंद्रे जनोन्स के नेतृत्व में, इस ऑपरेशन ने समर्थकों को वीडियो साझा करने, हैशटैग को बढ़ावा देने और नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
इसकी तेज वृद्धि विशेष रूप से उल्लेखनीय थी क्योंकि इसने लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक असंतुलन को पलट दिया। लूला की सेना के उदय ने कई समर्थकों को विश्वास दिलाया कि ब्राजील के वामपंथ ने डिजिटल क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा करने का तरीका खोज लिया है।
सोशल मीडिया की भूमिका
हालांकि, ऑनलाइन सक्रियता के चुनावी प्रभाव को मापना हमेशा कठिन होता है। लूला के सहयोगियों ने इसे उनकी वापसी में मददगार माना, लेकिन राजनीतिक वैज्ञानिकों का कहना है कि यह निर्धारित करना असंभव है कि कितने वोट वास्तव में व्हाट्सएप अभियान से प्रभावित हुए।
राजनीतिक वैज्ञानिक डेनिल्डे होल्ज़हेकर का मानना है कि लूला की अभियान रणनीति में बदलाव उनकी वापसी के लिए महत्वपूर्ण था। उन्होंने कहा कि वर्कर्स पार्टी के उम्मीदवार ने डिजिटल कैंपेनिंग को जमीनी स्तर पर सक्रियता के साथ जोड़ा।
भविष्य की दिशा
समाजशास्त्री और राजनीतिक वैज्ञानिक मायरा गुलार्ट का मानना है कि लूला के समर्थकों ने ऑनलाइन उत्साह को वास्तविक राजनीतिक सक्रियता में बदलने में सफलता पाई। उन्होंने कहा कि इस प्रयास ने न केवल मतदान को बढ़ावा दिया बल्कि यह लूला के अगले प्रशासन के लिए भी मूल्यवान साबित हो सकता है।
लूला ने अपनी जीत के भाषण में कहा कि इस चुनाव ने उन्हें कई सबक सिखाए हैं और उन्होंने वादा किया कि ब्राजील की शासन प्रणाली में बदलाव लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोग निर्णय लेने में अधिक भागीदारी करेंगे और डिजिटल संचार उनकी सरकार में एक बड़ा भूमिका निभाएगा।
Source: BBC World News
