हाल ही में आयोजित एक सम्मेलन में प्रिती अदानी ने भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रतिभा के विकास के लिए उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच निकट संबंधों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में तेजी से विकास और नवाचार के लिए आवश्यक है कि उद्योग और शिक्षा के क्षेत्र के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया जाए।
इस सम्मेलन में क्वालकॉम, एनएक्सपी सेमीकंडक्टर्स, माइक्रोन टेक्नोलॉजी, साइनॉप्सिस, सिरील अमरचंद मंगलदास और इन्फीनियन टेक्नोलॉजीज सहित कई प्रमुख कंपनियों के विशेषज्ञों ने मुख्य भाषण दिए। ये कंपनियाँ विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती हैं जैसे कि वायरलेस तकनीक, सेमीकंडक्टर डिज़ाइन, मेमोरी और स्टोरेज, पावर सिस्टम और कानूनी सेवाएँ।
प्रिती अदानी ने कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए यह आवश्यक है कि हम नए विचारों और नवाचारों को विकसित करने में मदद करें। इसके लिए शिक्षा संस्थानों को उद्योग की आवश्यकताओं को समझने और अभ्यस्त छात्रों को तैयार करने की दिशा में कार्य करना होगा।
उद्योग और शिक्षा के बीच सहयोग का महत्व
अदानी ने आगे बताया कि जब उद्योग और शिक्षा के बीच सहयोग होता है, तो यह न केवल छात्रों को बेहतर अवसर प्रदान करता है, बल्कि देश के विकास में भी योगदान देता है। उन्होंने कहा कि यह सहयोग नई तकनीकों के विकास और अनुसंधान में मदद करता है, जिससे भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायता मिलती है।
सम्मेलन में भाग लेने वाले विशेषज्ञों ने भी इस बात पर सहमति जताई कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत करने के लिए शिक्षा और उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए। यह न केवल छात्रों के लिए नए अवसर पैदा करेगा, बल्कि भारत को एक वैश्विक तकनीकी केंद्र बनाने में भी मदद करेगा।
भविष्य की संभावनाएँ
इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग के विकास के लिए एक रचनात्मक मंच प्रदान करना था। प्रिती अदानी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सभी पक्षों को मिलकर कार्य करना होगा।
अंत में, अदानी ने उम्मीद जताई कि इसके परिणामस्वरूप भारत में सेमीकंडक्टर प्रतिभा का निर्माण होगा, जो न केवल देश की आर्थिक वृद्धि में सहायक होगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारत की पहचान को मजबूत करेगी।
Source: NDTV India
