एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026 में बोलते हुए, अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने अमेरिका की विदेश नीति और उसकी रणनीतियों पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने जब 28 फरवरी को ईरान पर हमले शुरू किए, तो उसके पास तीन मुख्य लक्ष्य थे, जो अंततः विफल रहे।
अमेरिका की असफलताएँ
अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने स्पष्ट किया कि अमेरिका की योजना के अनुसार, ईरान पर हमले के माध्यम से वह मध्य पूर्व में स्थिरता लाने का प्रयास कर रहा था। हालांकि, इस हमले के परिणामस्वरूप क्षेत्र में युद्ध और अनिश्चितता उत्पन्न हुई।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की रणनीतियों ने उसे वैश्विक स्तर पर कमजोर बना दिया है। उनके अनुसार, अमेरिका ने अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में पूरी तरह से असफलता का सामना किया है, जिससे उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को भारी नुकसान हुआ है।
मध्य पूर्व में संघर्ष का महत्व
हकीम इलाही ने यह भी कहा कि इस संघर्ष का क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। उन्होंने बताया कि अमेरिका के हमलों ने न केवल ईरान, बल्कि पूरे मध्य पूर्व में तनाव को बढ़ा दिया है।
अमेरिकी हमलों के जवाब में, ईरान ने भी अपनी सैन्य ताकत को बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं। इस प्रकार, यह स्थिति न केवल अमेरिका के लिए, बल्कि उसके सहयोगियों के लिए भी चुनौतीपूर्ण बन गई है।
आगे का रास्ता
अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने यह सुझाव दिया कि अमेरिका को अपनी विदेश नीति में पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अमेरिका ने सही कदम नहीं उठाए, तो उसे और भी बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
आगे चलकर, यह देखना होगा कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को कम करने के लिए कौन से उपाय किए जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाने की आवश्यकता है, ताकि स्थायी शांति स्थापित की जा सके।
Source: NDTV India
