अल्बर्टा के लोगों ने भारी बहुमत से कनाडा का हिस्सा बने रहने के पक्ष में मतदान किया है, जिससे अलगाव की दिशा में कदम बढ़ाने का प्रस्ताव खारिज हो गया है। जब अधिकांश वोटों की गिनती हो चुकी थी, तो यह स्पष्ट हो गया कि प्रांत के दो-तिहाई से अधिक मतदाताओं ने स्वतंत्रता की बजाय देश का हिस्सा बने रहने का विकल्प चुना है। यह जानकारी चुनाव आयोग अल्बर्टा द्वारा दी गई।
प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने मंगलवार को इस निर्णय को “कनाडा के लिए एक शानदार परिणाम” बताया और कहा कि वे “खुश हैं कि अल्बर्टा के लोगों ने एकता का चयन किया है।” इस वर्ष की शुरुआत में प्रांत की नेता डेनियल स्मिथ ने जनता के आग्रह पर इस मतदान की घोषणा की थी। खुद स्मिथ ने अलगाव का विरोध किया लेकिन कहा कि जनता की इच्छा के अनुसार वोट कराना अपरिहार्य था।
अलगाववादियों की प्रतिक्रिया
एडमंटन में एक समर्थक अलगाववादी सभा के दौरान, जब चुनाव परिणाम की संभावना स्पष्ट हो गई, तो वहां की शांतिपूर्ण बातचीत अचानक रुक गई। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, अलगाववादी नेता जेफ्री राथ ने कहा कि “हमारा आंदोलन रुकने वाला नहीं है और हम आगे बढ़ते रहेंगे।” राथ ने इस वोट को “पहला कदम” बताया और कहा कि इससे आंदोलन ने कुछ “महत्वपूर्ण सबक” सीखे हैं।
अल्बर्टा में आगे की दिशा
स्मिथ ने पहले ही कहा था कि अगर मतदाता कनाडा का हिस्सा बने रहने के पक्ष में वोट करेंगे, तो अलगाव पर कोई और जनमत संग्रह उनके कार्यकाल में नहीं होगा। हालांकि, अलगाववादी नेताओं ने संकेत दिया है कि वे स्मिथ को उनके यूनाइटेड कंजर्वेटिव पार्टी से बाहर करने की योजना बना रहे हैं।
कनाडा पहले भी अपनी एकता के लिए चुनौतियों का सामना कर चुका है। क्यूबेक प्रांत ने 1980 और 1995 में दो बार स्वतंत्रता के लिए जनमत संग्रह कराया था, लेकिन दोनों असफल रहे थे। अल्बर्टा के अलगाववादी मानते हैं कि क्यूबेक ने स्वतंत्रता की धमकी देकर कनाडा की केंद्रीय सरकार से महत्वपूर्ण राजनीतिक लाभ प्राप्त किया।
Source: BBC World News
