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दिल्ली के जंतर मंतर का भविष्य: क्या विरोध का यह ऐतिहासिक स्थल खत्म हो रहा है?

दिल्ली में जंतर मंतर का नाम सुनते ही विरोध प्रदर्शन की यादें ताजा हो जाती हैं। यह स्थल लंबे समय से भारतीयों के लिए अपनी आवाज उठाने का केंद्र रहा है। हालाँकि, अब ऐसा लगता है कि यह सिलसिला थमने की कगार पर है। दिल्ली पुलिस ने हाल ही में घोषणा की है कि जंतर मंतर अब विरोध प्रदर्शन के लिए नामित स्थल नहीं रहेगा।

विरोध स्थल की भूमिका और बदलाव

जंतर मंतर, जो कभी एक प्रमुख पर्यटक स्थल था, ने 1993 से विरोध प्रदर्शनों की जगह के रूप में पहचान बनाई। उस समय कांग्रेस सरकार ने पुराने संसद भवन के सामने स्थित बोट क्लब लॉन पर प्रदर्शन की अनुमति रोक दी थी। इस बदलाव के बाद जंतर मंतर ने कई ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शनों को देखा है।

हाल ही में, जेन जेड द्वारा संचालित कॉकरोच जनता पार्टी ने यहां एक बड़ा प्रदर्शन किया, जिसमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई थी। इस प्रदर्शन के बाद प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। इसके कुछ ही समय बाद पुलिस ने जंतर मंतर को घेर लिया, जिससे आगे के प्रदर्शन रुक गए।

विरोध की नई जगहें और चुनौतियाँ

अब प्रदर्शनकारियों को तीन अन्य स्थलों की ओर निर्देशित किया गया है। इनमें से दो स्थल संसद से काफी दूर हैं और तीसरा, रामलीला मैदान, अक्सर महीनों पहले से बुक रहता है। इसके अलावा, जंतर मंतर के विपरीत, इन स्थलों पर प्रदर्शन के लिए हजारों रुपये का शुल्क लगता है।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के बाद उठाया गया है, जिसमें पर्याप्त बुनियादी ढांचे वाले वैकल्पिक स्थलों की पहचान की बात कही गई थी। लेकिन आलोचकों का मानना है कि इससे आम भारतीयों के लिए विरोध प्रदर्शन करना कठिन हो जाएगा, क्योंकि ये स्थल सत्ता के केंद्र से दूर हैं और महंगे भी हैं।

जंतर मंतर के महत्व की पहचान

इतिहासकार हरलीन कौर ने बताया है कि कैसे 1960 के दशक से सरकारों ने प्रदर्शन स्थलों को संसद से दूर ले जाने के लिए नए नियम बनाए। जंतर मंतर 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित था, जिससे सरकार को प्रदर्शनकारी भीड़ को संसद भवन और प्रधानमंत्री के निवास से दूर रखने में मदद मिली।

यह स्थल न केवल बड़े आंदोलनों का गवाह रहा है, बल्कि यहां छोटे-छोटे व्यक्तिगत विरोध भी हुए हैं। लोग अपने मुद्दों को उठाने के लिए यहां आते थे, जब अन्य दरवाजे बंद हो जाते थे।

विरोध प्रदर्शन का भविष्य

जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शनों का भविष्य अभी अनिश्चित है। सुप्रीम कोर्ट में इस स्थल को विरोध स्थल से हटाने के खिलाफ याचिकाएं लंबित हैं। विपक्षी नेता राहुल गांधी और सीजेपी नेता इसे जनता का स्थल बताते हुए इसे “पुनः प्राप्त” करने की बात कर रहे हैं।

जंतर मंतर अब दशकों में सबसे शांत है। क्या यह फिर से नारों की गूंज सुनेगा?

Source: BBC World News

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