पाकिस्तान ने इमरान खान के राजनीतिक गढ़ खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल की स्थिति लागू कर दी है। इस कदम के तहत स्कूल बंद कर दिए गए, इंटरनेट सेवाएं आंशिक रूप से बंद कर दी गईं और सड़कें शिपिंग कंटेनरों से अवरुद्ध कर दी गईं। यहां तक कि सेना को भी तैनात कर दिया गया है। इमरान खान की पार्टी के समर्थकों और पाकिस्तान सरकार के बीच यह तनावपूर्ण स्थिति और बढ़ सकती है।
संघीय सरकार का पक्ष
संघीय सरकार का दावा है कि यह कदम संविधान के तहत लिया गया है ताकि आतंकवाद के खतरे से प्रदेश की जनता की सुरक्षा की जा सके। संघीय सूचना मंत्री अत्ताह तारार ने कहा कि पीटीआई की खैबर पख्तूनख्वा सरकार आतंकवादियों के साथ मिली हुई थी। हालांकि उन्होंने इस दावे का कोई सबूत नहीं दिया, लेकिन जल्द ही सबूत पेश करने का वादा किया।
प्रदर्शन और गिरफ्तारी
मंगलवार को पीटीआई के समर्थकों ने खैबर जिले के बारा में प्रदर्शन किया, जहां आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इस बीच, पीटीआई के कई नेता भूमिगत हो गए हैं। पार्टी के नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि सरकार का कहना है कि वह सुरक्षा हिरासत में हैं।
पिछला घटनाक्रम
इससे पहले सितंबर में इमरान खान की तीन बहनों को गिरफ्तार किया गया था, जिन पर समर्थकों को जुटाने का आरोप था। इमरान खान को अगस्त 2023 से जेल में रखा गया है और वह कई भ्रष्टाचार मामलों में दोषी ठहराए गए हैं, जिन्हें वे राजनीति से प्रेरित बताते हैं।
आलोचना और संभावित परिणाम
विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम उल्टा पड़ सकता है। अटलांटिक काउंसिल के सीनियर फेलो माइकल कुगेलमैन का मानना है कि यह कदम सरकार पर दबाव बढ़ा सकता है। इस स्थिति में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है और इस कदम से सरकार पर और अधिक जिम्मेदारी आ सकती है।
Source: BBC World News
