म्यांमार के हपा-अन शहर में युवा और सक्षम पुरुषों के लिए रात के समय बाहर रहना खतरनाक साबित हो सकता है। हाल के महीनों में यह एक आम धारणा बन गई है। लेकिन 26 वर्षीय टुक टुक चालक, जॉ मिन के पास कोई अन्य विकल्प नहीं है। “मुझे चिंता है, लेकिन मुझे काम के लिए बाहर जाना पड़ता है,” वे कहते हैं। उनका परिवार उन्हें बार-बार फोन करके सावधान रहने की सलाह देता है।
जबरन भर्ती का डर
हपा-अन की सड़कों पर म्यांमार की सेना के समर्थन में काम कर रहे लोग घूम रहे हैं, जो युवाओं को जबरन सैन्य सेवा में धकेल रहे हैं। बीबीसी बर्मीज़ द्वारा देखे गए लीक दस्तावेजों के अनुसार, अधिकारियों को सैन्य भर्ती कोटा को पूरा करने का आदेश दिया गया है। यह कदम सेना की लगातार बढ़ती मुश्किलों का सामना करने के लिए उठाया गया है।
जॉ मिन के परिवार में वही एकमात्र व्यक्ति हैं जो भर्ती की उम्र में हैं। उनके कई साथी पहले ही थाईलैंड या अन्य स्थानों पर चले गए हैं। जो लोग बचे हैं, उन्हें सख्त हिदायत दी गई है कि वे सूर्यास्त से पहले घर पहुंच जाएं।
अनिवार्य सैन्य सेवा का प्रभाव
फरवरी 2021 में सैन्य तख्तापलट के बाद से म्यांमार में गृह युद्ध चल रहा है। अब अनिवार्य सैन्य सेवा कानून के तहत 18 से 35 वर्ष के पुरुषों और 18 से 27 वर्ष की महिलाओं को कम से कम दो वर्षों के लिए सेवा में शामिल होना अनिवार्य कर दिया गया है। जो लोग मना करते हैं, उन्हें पांच साल तक की सजा का सामना करना पड़ सकता है।
मेजर नांग यो, जो अब सिविल डिसओबीडियंस मूवमेंट का हिस्सा हैं, कहते हैं कि यह कानून नागरिकों के खिलाफ उठाए गए सबसे गंभीर कदमों में से एक है। हपा-अन में जबरन भर्ती का जाल पहले ही 100,000 युवाओं को अपनी चपेट में ले चुका है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने म्यांमार की सेना पर नागरिकों को जबरन भर्ती करने का आरोप लगाया है। म्यांमार विटनेस के एक अध्ययन के अनुसार, लापता व्यक्तियों की संख्या में वृद्धि हुई है। यह दर्शाता है कि सेना की भर्ती प्रक्रिया में जबरन गुमशुदगी, हिरासत और दबाव शामिल हैं।
म्यांमार के नागरिक अब एक ऐसे संघर्ष में लड़ने के लिए मजबूर किए जा रहे हैं, जिसे वे न तो मानते हैं और न ही समर्थन करते हैं। यह स्थिति देश की अर्थव्यवस्था और समाज पर गहरा प्रभाव डाल रही है।
Source: BBC World News
