नई दिल्ली में आयोजित 5वें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में मुख्य भाषण देते हुए, प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव पीके मिश्रा ने कहा कि व्यापार नीति की बदलती प्रकृति आर्थिक स्थिति और नीति निर्माताओं के लिए अनिश्चितता बढ़ा रही है।
व्यापार नीति में परिवर्तन
पीके मिश्रा ने अपने संबोधन में उल्लेख किया कि वैश्विक व्यापार में वर्तमान समय में जो परिवर्तन हो रहे हैं, वे केवल आर्थिक कारकों से प्रेरित नहीं हैं, बल्कि इनका गहरा संबंध राजनीतिक उद्देश्यों से भी है। उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों द्वारा टैरिफ और निर्यात नियंत्रण का उपयोग रणनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है, जिससे वैश्विक व्यापार में अस्थिरता बढ़ रही है।
इस संदर्भ में, उन्होंने कहा कि नीति निर्माताओं को इस बदलाव को समझना आवश्यक है, ताकि वे सही निर्णय ले सकें। वैश्विक स्तर पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा और आर्थिक दबाव ने व्यापार नीति को अधिक जटिल बना दिया है।
आर्थिक अनिश्चितता के प्रभाव
मिश्रा ने इस बात पर जोर दिया कि व्यापार नीति में ये बदलाव केवल विकासशील देशों को ही प्रभावित नहीं कर रहे, बल्कि विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस अनिश्चितता के परिणामस्वरूप, निवेशकों का विश्वास कमजोर हो रहा है, जिससे आर्थिक विकास की गति धीमी हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे समय में, नीति निर्माताओं को लचीला और दृष्टिकोण रखने की आवश्यकता है, ताकि वे वैश्विक आर्थिक परिवर्तनों का सामना कर सकें।
आगे का रास्ता
पीके मिश्रा ने अंत में सुझाव दिया कि देशों के बीच सहयोग और संवाद को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आर्थिक सुरक्षा और स्थिरता के लिए इस तरह के उपाय महत्वपूर्ण हैं। यह स्पष्ट है कि भविष्य की व्यापार नीति को अधिक समावेशी और सामंजस्यपूर्ण बनाने की आवश्यकता है, ताकि सभी देशों को लाभ मिल सके।
इस प्रकार, उन्होंने सम्मेलन में उपस्थित सभी नीति निर्माताओं से अनुरोध किया कि वे इन मुद्दों को गंभीरता से लें और वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए मिलकर काम करें।
