इस्लामाबाद: फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने इस्लामाबाद क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को 92 नर्सों को सऊदी अरब भेजने के मामले में सजा दिलाई है। इन नर्सों को नकली अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर भेजा गया था। अदालत ने मुख्य आरोपी को 41 साल की कैद की सजा सुनाई है और उस पर 9 मिलियन रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया है।
FIA और अदालत के रिकार्ड के अनुसार, रावलपिंडी की विशेष अदालत के जज, अब्दुल रहमान मुहम्मद अरीफ ने यह फैसला 23 सितंबर को सुनाया। यह मामला पाकिस्तान दंड संहिता (PPC) की धाराओं 34/420/468/471/109 और प्रवासन अध्यादेश (EO) 1979 की धाराओं 18/22 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PCA) 1947 की धारा 5(2) के तहत दर्ज किया गया था।
92 नर्सों का मामला
इस मामले में 92 नर्सों को नकली अनुभव प्रमाण पत्र पर सऊदी अरब भेजा गया था, जिन्हें एक महीने के भीतर वापस भेज दिया गया। FIA ने कहा कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में प्रगति के बारे में नियमित रूप से प्रधानमंत्री कार्यालय को जानकारी दी गई थी।
साथी को मिली तीन साल की सजा
अदालत के आदेश के अनुसार, मुख्य एजेंट गुलाम जुल्फिकार अली उर्फ मियां जुल्फिकार, जो कि दिन मुहम्मद का पुत्र है, को सात साल की कठोर सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही उस पर कई धाराओं के तहत अलग-अलग जुर्माना भी लगाया गया है। कुल मिलाकर उसे 41 साल की सजा सुनाई गई है।
अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि दोषी जुल्फिकार अली को नर्सों को मुआवजे के रूप में 9.2 मिलियन रुपये का भुगतान करना होगा, जो प्रति पीड़ित 100,000 रुपये होगा। यह राशि भूमि राजस्व के बकायों के रूप में वसूली जाएगी। यदि वह भुगतान में चूक करता है, तो उसे छह महीने की साधारण कैद भुगतनी होगी। यह राशि FIA इस्लामाबाद क्षेत्र के निदेशक के पास जमा की जाएगी ताकि सभी 92 पीड़ित नर्सों के बीच वितरित की जा सके।
दूसरे आरोपी, गुलाम फरीद, जो मुहम्मद सादिक का पुत्र है, को प्रवासन अध्यादेश 1979 की धारा 18 के तहत तीन साल की सजा और 200,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। हालांकि, उसे धारा 22 के तहत आरोपों से बरी कर दिया गया है।
