त्रिपुरा के जनजातीय क्षेत्रों के स्वायत्त जिला परिषद के एक पूर्व कर्मचारी ने आरोप लगाया है कि उनकी पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ, जो कि 16 लाख रुपये के बराबर हैं, उन्हें 2025 में सेवानिवृत्त होने के बाद से नहीं दिए गए हैं।
पेंशन की लंबित राशि
सेवानिवृत्त कर्मचारी का नाम अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके द्वारा प्राप्त की जाने वाली पेंशन और अन्य लाभों का यह मामला उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि परिषद के भीतर प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कोई बाधा उत्पन्न हो गई है, जिसके कारण उनके बकाया लाभों का भुगतान नहीं किया गया।
कर्मचारी ने बताया कि उन्होंने कई बार संबंधित विभाग से संपर्क किया है, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। इसके चलते उन्होंने यह मामला मीडिया में उठाने का निर्णय लिया है।
जनजातीय परिषद का निर्णय
इस बीच, त्रिपुरा जनजातीय परिषद ने अधिकारियों के वेतन को रोकने का फैसला किया है। परिषद के अनुसार, यह निर्णय कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने और वित्तीय अनुशासन को सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। परिषद का कहना है कि जब तक वेतन भुगतान के लिए उचित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जाता, तब तक वेतन जारी नहीं किया जाएगा।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह कदम परिषद के भीतर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। परिषद के अधिकारियों ने बताया कि वेतन रोकने का यह निर्णय अस्थायी है और इसका उद्देश्य केवल सुधारात्मक उपायों के लिए है।
भविष्य की कार्रवाई
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि त्रिपुरा जनजातीय परिषद इस मामले में क्या कदम उठाती है। पूर्व कर्मचारी की पेंशन का मुद्दा न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन पर प्रभाव डाल रहा है, बल्कि यह अन्य कर्मचारियों के लिए भी एक चेतावनी का संकेत है। यदि परिषद अपने वादों को पूरा करने में विफल रहती है, तो यह कर्मचारियों के बीच असंतोष को बढ़ा सकता है।
इस स्थिति पर नजर रखने के लिए, कर्मचारियों और जनजातीय परिषद के बीच संवाद स्थापित करना आवश्यक होगा। यदि समस्या का समाधान समय पर नहीं किया गया, तो यह परिषद के कार्यों और संचालन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
