नेशनल इलेक्ट्रिक पावर रेगुलेटरी अथॉरिटी (नेप्रा) ने के-इलेक्ट्रिक के लिए औसत बेस टैरिफ को 32.37 रुपये प्रति यूनिट पर अधिसूचित किया है। यह निर्णय सात-वर्षीय मल्टी-ईयर टैरिफ (एमवाईटी) योजना के तहत वित्त वर्ष 2024 से 2030 के लिए लिया गया है। इस निर्णय के कारण सरकार की सब्सिडी बोझ लगभग 200 अरब रुपये तक कम हो जाएगी।
के-इलेक्ट्रिक की आपत्ति और कानूनी कार्रवाई
नेप्रा ने पहले के-इलेक्ट्रिक के मल्टी-ईयर टैरिफ को 39.97 रुपये प्रति यूनिट पर निर्धारित किया था, लेकिन कई याचिकाओं के बाद इसे 32.37 रुपये प्रति यूनिट पर संशोधित किया गया। के-इलेक्ट्रिक ने इस संशोधित टैरिफ के खिलाफ सिंध उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जहां से मामला नेप्रा की अपीलीय न्यायाधिकरण को भेजा गया था।
बुधवार को तीन-सदस्यीय न्यायाधिकरण ने नेप्रा के संशोधित निर्णय को बरकरार रखा और के-इलेक्ट्रिक की अपील को खारिज कर दिया। इसके बाद नेप्रा ने चार संबंधित गजट अधिसूचनाएं जारी कीं और स्पष्ट किया कि के-इलेक्ट्रिक के उपभोक्ताओं से नियामक द्वारा निर्धारित टैरिफ नहीं वसूला जाएगा।
वित्तीय अस्थिरता और भविष्य की योजनाएं
के-इलेक्ट्रिक के प्रवक्ता ने संकेत दिया कि कंपनी इस निर्णय को चुनौती दे सकती है, क्योंकि संशोधित टैरिफ को वित्तीय दृष्टि से अस्थिर माना जा रहा है। प्रवक्ता ने कहा कि न्यायाधिकरण के निर्णय के बाद कंपनी सभी कानूनी उपायों पर विचार करेगी।
सरकार ने पहले नेप्रा के 39.97 रुपये प्रति यूनिट बेस टैरिफ को चुनौती दी थी, जिसका तर्क था कि यह के-इलेक्ट्रिक को अनुचित लाभ देता है। नेप्रा ने कुछ याचिकाओं को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया, लेकिन कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को स्वीकार किया।
