कनाडा में कनीश्का बम विस्फोट के 41 साल बाद, एक व्यक्ति की यात्रा न केवल व्यक्तिगत त्रासदी को दर्शाती है, बल्कि यह भी कि इस घटना ने कितने लोगों के जीवन को प्रभावित किया। इस बम विस्फोट ने कई परिवारों को बुरी तरह प्रभावित किया, जिसमें मेरे परिवार का भी नाम शामिल है।
मैंने अपने प्रियजनों की पहचान के लिए एक अस्थायी शवगृह में 25 दिन बिताए। यह समय मेरे लिए अत्यंत कठिन था, क्योंकि मुझे न केवल अपने परिवार के सदस्यों को खोने का दुख सहन करना पड़ा, बल्कि उनके शवों को पहचानने की भी चुनौती थी।
कनाडा के अधिकारियों की ओर से इस मामले को बंद करने की इच्छा इस बात का संकेत है कि वे शायद इस मुद्दे को आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं। लेकिन क्या यह सही है? क्या हम उन लोगों को भूल सकते हैं जो इस त्रासदी में मारे गए थे? क्या हमें उन सवालों के जवाब नहीं चाहिए जो आज भी अनुत्तरित हैं?
यह मामला केवल एक बम विस्फोट से कहीं अधिक है। यह उन परिवारों की कहानी है जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है और जो अब न्याय की तलाश में हैं।
