कांग्रेस ने हाल ही में बीआरआईसीएस शिखर सम्मेलन की घोषणा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इस घोषणा में लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। यह टिप्पणी कांग्रेस के नेता नाना पटोले द्वारा की गई, जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चीन द्वारा कब्जाई गई क्षेत्रों के मुद्दे पर स्पष्ट रूप से बात करने का आग्रह किया।
कांग्रेस का रुख
कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख जैसे क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया है, और यह समय है कि प्रधानमंत्री मोदी इस विषय पर सख्त बोलें। उनका मानना है कि भारत को इस शिखर सम्मेलन से सबसे बड़ा लाभ तभी मिलेगा जब भारत स्पष्ट रूप से चीन से अपनी जमीन वापस लेने की मांग करेगा।
पटोले ने यह भी कहा कि यह भारत की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है कि प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर एक सख्त रुख अपनाएं। उनका यह बयान तब आया है जब भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव जारी है, और ऐसे में बीआरआईसीएस जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस विषय को उठाना महत्वपूर्ण हो जाता है।
बीआरआईसीएस का महत्व
बीआरआईसीएस, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं, एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच है जहां विश्व के प्रमुख उभरते बाजारों के नेता एक साथ आते हैं। इस मंच पर विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होती है, जिसमें सुरक्षा से लेकर आर्थिक सहयोग तक शामिल हैं।
हालांकि, कांग्रेस का आरोप है कि वर्तमान में भारत की स्थिति को ध्यान में रखते हुए, लद्दाख और अरुणाचल का उल्लेख न होना चिंता का विषय है। इसे भारतीय जमीन के प्रति सरकार की लापरवाही के रूप में देखा जा रहा है।
आगे का रास्ता
कांग्रेस के इस बयान के बाद, यह देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है। क्या प्रधानमंत्री मोदी इस विषय को उठाने के लिए आगे आएंगे या फिर मौजूदा स्थिति को नजरअंदाज करेंगे? यह सवाल अब महत्वपूर्ण हो गया है।
इस बयान के साथ, कांग्रेस ने एक बार फिर से केंद्र सरकार पर निशाना साधा है, और यह स्पष्ट किया है कि भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अगर प्रधानमंत्री मोदी इस शिखर सम्मेलन में चीन के खिलाफ एक सख्त रुख अपनाते हैं, तो यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक जीत हो सकती है।
