हाल ही में आयोजित फिनटेक महोत्सव के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के विस्तार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस दिशा में कदम उठाने के लिए कुछ विशेष देशों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
मोदी ने अपने संबोधन में उन देशों की पहचान की, जहाँ भारतीय प्रवासी बड़ी संख्या में रहते हैं, वे देश जहाँ भारत के साथ व्यापार की मात्रा अधिक है, या वे देश जो हमारे साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं। ऐसे देशों के साथ यूपीआई आवेदन को जोड़ना महत्वपूर्ण होगा, ताकि डिजिटल भुगतान प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
यूपीआई के वैश्विक विस्तार का महत्व
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि यूपीआई का विस्तार न केवल भारतीय प्रवासियों के लिए उपयोगी होगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर व्यापार को भी बढ़ावा देगा। इससे अन्य देशों में भारतीय उत्पादों की पहुंच में वृद्धि होगी और व्यापारिक रिश्तों को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि यूपीआई प्रणाली के माध्यम से, भारतीय व्यापारी और उपभोक्ता बिना किसी बाधा के अंतरराष्ट्रीय लेन-देन कर सकेंगे। इससे वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा मिलेगा और लोगों को सस्ती और सुविधाजनक वित्तीय सेवाएं उपलब्ध होंगी।
आगे का रास्ता
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि यूपीआई के वैश्विक विस्तार के लिए तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना महत्वपूर्ण है। इसके लिए, भारत को ऐसे देशों के साथ साझेदारी करनी होगी जो तकनीकी सहयोग और विकास में रुचि रखते हैं।
इस संदर्भ में, मोदी ने कहा कि भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली की सफलता का अनुभव अन्य देशों के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य कर सकता है। इससे न केवल आर्थिक विकास में तेजी आएगी, बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्थिति को भी मजबूत करेगी।
उपयुक्त साझेदारियों और समर्पित प्रयासों के माध्यम से, भारत उम्मीद करता है कि यूपीआई का विस्तार वैश्विक स्तर पर एक नई क्रांति ला सकता है। इससे वित्तीय लेन-देन की प्रक्रिया को सरल और अधिक पारदर्शी बनाया जा सकेगा, और इससे सभी के लिए लाभकारी स्थिति उत्पन्न होगी।
