इस्लामाबाद में पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पीआईएमएस) में लगी आग की जांच को लेकर संसद के दोनों सदनों की स्थायी समितियों ने सोमवार को सवाल उठाए। इस हादसे में 14 नवजात शिशुओं की मौत हो गई थी। जांच में सीसीटीवी फुटेज अधूरी पाई गई और नर्सरी में मौजूद बच्चों की संख्या में भी विवाद पाया गया।
जांच रिपोर्ट पर असंतोष
इस हादसे की जांच के लिए गठित समिति ने शनिवार को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंपी थी। इसके बाद प्रधानमंत्री ने आठ अधिकारियों को निलंबित कर उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई का आदेश दिया। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस्लामाबाद हेल्थकेयर रेगुलेटरी अथॉरिटी के अध्यक्ष डॉ. रियाज शाहबाज जनजुआ का इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया।
डॉ. जनजुआ ने अपने इस्तीफे में कहा कि कुछ परिस्थितियों ने प्राधिकरण की स्वायत्तता को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में उनके लिए स्वतंत्र और प्रभावी ढंग से काम करना संभव नहीं है।
राष्ट्रीय सभा समिति की प्रतिक्रिया
राष्ट्रीय सभा की स्वास्थ्य स्थायी समिति, जिसकी अध्यक्षता एमएनए महेश कुमार मालानी कर रहे थे, जांच समिति की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं थी। मालानी ने कहा, “हमने पीआईएमएस त्रासदी के संबंध में यह बैठक बुलाई है क्योंकि हम प्रधानमंत्री द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हैं।”
स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमाल ने जांच का बचाव किया और सदस्यों को अपनी आपत्तियां उठाने के लिए आमंत्रित किया। शाज़िया सूमरो ने पूछा कि विधानसभा की स्थायी समिति को घटना की परिस्थितियों के बारे में ठीक से जानकारी क्यों नहीं दी गई।
सीनेट समिति की चिंताएं
सीनेट स्थायी समिति ने अस्पताल की सुरक्षा उपायों की कमी पर निंदा की। अध्यक्षता करते हुए सीनेटर आमिर वलीउद्दीन चिश्ती ने कहा कि आग की सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया था और कोई नियमित फायर ड्रिल नहीं की गई थी।
समिति ने यह भी निर्देश दिया कि अस्पताल प्रशासन को वार्डों और प्रवेश बिंदुओं पर सभी बाधाओं को तुरंत हटाना चाहिए। समिति ने आग की घटना की गहन और निष्पक्ष जांच की मांग की।
समिति ने आईएचआरए बोर्ड की संरचना और कामकाज पर भी सवाल उठाए और कहा कि संबंधित प्राधिकरणों के प्रदर्शन और समन्वय में गंभीर असंतोष है।
