इस्लामाबाद: इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने पाकिस्तान में छात्र वीजा पर रह रहे 87 अफगान छात्रों के लिए वीजा विस्तार की मांग करने वाली संवैधानिक याचिका की स्थिरता पर महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न उठाए हैं।
न्यायमूर्ति खदीम हुसैन सोमरो ने अफगान छात्रों की कानूनी स्थिति और उनके वकील की अदालत में उनके प्रतिनिधित्व करने की क्षमता पर सवाल उठाए।
सुनवाई के दौरान उठाए गए प्रश्न
सुनवाई के दौरान, न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि अफगान छात्रों को पाकिस्तान में प्रवेश की अनुमति देने की परिस्थितियाँ क्या थीं और क्या अन्य देशों के छात्रों के लिए भी ऐसा ही treatment मांगा जा सकता है।
“सर, हम इस समय अफगानों के साथ युद्ध में हैं। यदि भारतीय छात्र आते हैं, तो क्या आप उन्हें भी आने की अनुमति देंगे?” न्यायमूर्ति सोमरो ने वकील से पूछा।
वकील ने बताया कि 87 अफगान छात्र 2023 में पाकिस्तान आए थे, जब उनके अनुसार, अफगान छात्रों के संबंध में राष्ट्रीय नीति भिन्न थी।
याचिका की संवैधानिक वैधता
न्यायमूर्ति सोमरो ने अवलोकन किया कि यह याचिका उच्च न्यायालय की संवैधानिक अधिकार क्षेत्र में दायर की गई थी और पूछा कि क्या संविधान अफगान नागरिकों को इस अधिकार क्षेत्र को लागू करने का अधिकार देता है।
वकील ने तर्क किया कि छात्रों ने एक वर्ष की अवधि के लिए वैध छात्र वीजा पर पाकिस्तान में प्रवेश किया था और उनकी उपस्थिति सरकार द्वारा अनुमोदित थी।
इसके बाद न्यायाधीश ने प्रश्न किया कि वकील ने 87 अफगान छात्रों से पावर ऑफ अटॉर्नी किस अधिकार के तहत प्राप्त की है।
अफगान दूतावास का सुझाव
न्यायालय ने यह सुझाव दिया कि छात्रों को उनके मामले से संबंधित अफगान दूतावास से संपर्क करना चाहिए, बजाय इसके कि वे इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र के माध्यम से राहत मांगें।
“आपको अफगान दूतावास जाना चाहिए, और आपका मामला वहां सुना जाएगा। अफगान दूतावास पाकिस्तानी दूतावास से संपर्क करेगा,” न्यायमूर्ति ने टिप्पणी की।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वह कार्यवाही के दौरान उठाए गए कानूनी प्रश्नों पर अदालत की मदद करेंगे।
यह मामला 2023 में अध्ययन के लिए पाकिस्तान आए 87 अफगान छात्रों के वीजा विस्तार से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं ने अपने छात्र वीजा की समाप्ति या संभावित समाप्ति के बाद पाकिस्तान में उनके निरंतर निवास के संबंध में राहत मांगी है।
अदालत ने इसके बाद मामले की आगे की सुनवाई स्थगित कर दी।
दिवसांक: 29 अगस्त, 2026
